मै मानता हूँ कि.......
यहाँ एकत्रित शब्दों का समूह कविता या कहानी नहीं हो सकता, क्योंकि ऐसा करने के किए शब्दों का सामर्थ्य एवं भाषा की जानकारी आवश्यक है, और ये विद्वान् लोग ही कर सकते है जो कि मै नहीं हूँ.
लेकिन ......
मनोभावों की उत्पति सिर्फ विद्वान् लोगो में ही पायी जाती हो ऐसी भी बात नहीं. ये मनोभावों का ज्वार तो भाषा के अज्ञानी लोगों में भी उठ सकता है, क्योंकि मनोंभावों का, व्यक्ति के भेष, भाषा, भूगोल, लिंग या उम्र के परिधि से कोइ सम्बन्ध नहीं है.
फिर वे क्या करेगें अपनी अभिव्यक्तियों का ?.......
शायद वही जो मैंने इस जगह पर किया है. संभवत: एक कोशिस, जिन्दगी के कुछ पहलुओं को यहाँ पर समेटने की, जो कभी कभी किसी को कविता या कहानी का अहसास करा सकता है.
कोई होता है मेरे आस- पास
पर दिखाई नहीं देता,
खिचता है अपनी तरफ वह
किसी अदृश्य डोर से,
बदल जाती है दिशाएं
न जाने किस मोड़ से,
आवाज़ आती है उसकी
कुछ कहने की
इस शहर के शोर में
वो सुनाई नहीं देता,
अक्सर,
कोई होता है मेरे आस-पास
पर दिखाई नहीं देता.
कुछ अधूरा सा लगता है
हर वो लम्हा जिसमे
उसका आभाष न हो,
कुछ खाली सा लगता है
वो महफ़िल जिसमे
उनकी आग़ाज न हो,
बेअर्थ हो जाती है सारी तैयारियाँ
जिसमे उनकी फरमाईस न हो,
हुआ करता है
कुछ संवाद हमारे बीच
नाज़ुक रिस्तो को लेकर,
समाधान किसी मोड़ पर
दिखाई नहीं देता,
अक्सर,
कोइ होता है मेरे आस-पास
पर दिखाई नहीं देता.
अक्सर,
अक्सर हम अपनी बातों को
उनसे कह नहीं पाते,
जब लम्हा कोई गुजरता है
उनकी तस्वीर लिए,
आरजू उन्हें छूने की
हम रोक नहीं पाते.
सिलसिला,
रुकता नहीं उस सफर का
जहां हम पहुँच नहीं पाते,
कदम उठते है जो मंजिल की तरफ
उन कदमों की आहट को
वो सुन नहीं पाते
अक्सर हम अपनी बातों को
उनसे कह नहीं पाते.
उनके आशियानें में
मेरे नाम का कोई जगह न सही,
मेरे यादों के महल से वो निकल नहीं पाते.
मेरे इस हालात का अहसास,
शायद उन्हें हो ना हो
हम अपनी कहानी
उन्हें सुना नहीं पाते,
हम चाह कर भी अपनी बातों को
उन्हें रख नहीं पाते.
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I welome you at Abhivyakti Ek Man Kee. I will be gratefule to you if your send me few words of comments . No matter what that words say.
Thanks
R.P. Yadav
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